महिला समूहों को संग्रहण से मार्केटिंग तक जोड़ने की पहल को बताया दूसरे राज्यों के लिए उपयोगी
रायपुर, छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज के जरिए जनजातीय समुदायों की आजीविका बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल को नीति आयोग ने सराहा है। नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) के दल ने राज्य का अध्ययन भ्रमण कर वन धन विकास केंद्रों की कार्यप्रणाली और वनोपज आधारित आजीविका मॉडल का जायजा लिया। दल ने इस मॉडल को अन्य राज्यों के लिए उपयोगी और अपनाने योग्य बताया।
संग्रहण से बाजार तक महिलाओं की भागीदारी
अध्ययन के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों को लघु वनोपज के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और उत्पादों की मार्केटिंग तक जोड़ने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे स्थानीय स्तर पर वनोपज को केवल कच्चे उत्पाद के रूप में बेचने के बजाय उससे जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने में मदद मिल रही है।
नीति आयोग की महानिदेशक निधि छिब्बर के नेतृत्व में आए दल को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक संजीता गुप्ता ने राज्य में चल रही आजीविका गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन और पीएम-जनमन के तहत वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से महिला समूहों को मिल रहे अवसरों और सहयोग के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया।
महिला समूहों को लगातार सहयोग से बढ़ रहे रोजगार के अवसर
निधि छिब्बर ने राज्य शासन और लघु वनोपज संघ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिला समूहों को वनोपज से जुड़े अलग-अलग चरणों में लगातार सहयोग मिलने से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े महिला समूहों को भी वन धन विकास केंद्रों से जोड़ा जाए। साथ ही भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन समूहों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
वनोपज से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर जोर
छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्रों से मिलने वाले लघु वनोपज को स्थानीय आजीविका का आधार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वन धन विकास केंद्रों के जरिए संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने से स्थानीय समुदायों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य में लघु वनोपज आधारित आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। अध्ययन भ्रमण के दौरान राज्य नीति आयोग और ट्राइफेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।