रायपुर। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) देश के आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार है। जीएसटी ने जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिलने के साथ भारतीय कारोबार को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के बेहतर अवसर मिले हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक तकनीक के उपयोग से कर प्रशासन एवं सेवाओं को और अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है।

वित्त मंत्री चौधरी दुर्ग जिले के अंजोरा स्थित पृथ्वी पैलेस में टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री एवं दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव, जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कर विशेषज्ञ, अधिवक्ता और टैक्स प्रैक्टिशनर्स शामिल हुए।

जीएसटी से कर प्रणाली हुई सरल

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले देश में विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करों और उपकरों की अलग-अलग व्यवस्थाएं थीं। इससे व्यापारियों को कर भुगतान और अनुपालन की प्रक्रियाओं में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जीएसटी ने विभिन्न करों को एकीकृत कर साझा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था विकसित की। इससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कर चोरी पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था विकसित भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है। जीएसटी सुधारों ने कारोबार को सुगम बनाने और भारतीय उद्यमियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है।

टैक्स प्रैक्टिस में एआई की बढ़ेगी भूमिका

चौधरी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव अब कर प्रशासन, लेखांकन, विधिक अनुसंधान, दस्तावेजों के विश्लेषण और कर अनुपालन जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। एआई आधारित उपकरणों के उपयोग से कार्यों की सटीकता और दक्षता बढ़ाने की संभावनाएं हैं। ऐसे में कर विशेषज्ञों के लिए नई तकनीकों को समझना और उन्हें अपने कार्यों में अपनाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि टैक्स बार एसोसिएशन के सदस्य करदाताओं और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। तकनीकी रूप से दक्ष होने से वे करदाताओं को बेहतर सेवाएं दे सकेंगे। समिट में आयोजित तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी गई।

विधि शिक्षा में जीएसटी कानून शामिल करने का सुझाव

समिट के दौरान टैक्स बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने मंत्री गजेंद्र यादव के समक्ष विधि शिक्षा के पाठ्यक्रम में जीएसटी कानून को शामिल करने का सुझाव रखा। प्रतिनिधियों का कहना था कि जीएसटी का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विधि के विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही अप्रत्यक्ष कर प्रणाली और जीएसटी कानून की व्यावहारिक जानकारी मिलने से उन्हें पेशेवर क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

ज्ञान और तकनीक का समन्वय जरूरी

जीएसटी अपीलीय अधिकरण की प्रधान पीठ के अध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए ज्ञान और कर्म का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान के साथ किया गया कर्म लक्ष्य प्राप्ति में अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने कर एवं विधिक क्षेत्र के विशेषज्ञों से बदलती तकनीकों को समझने और उनका उचित उपयोग करने का आह्वान किया।

प्रदेशभर के कर विशेषज्ञ हुए शामिल

छत्तीसगढ़ टैक्स टेक समिट 2026 का आयोजन टैक्स बार काउंसिल के अध्यक्ष विवेक सारस्वत एवं गोपाल कृष्ण तवनिया के नेतृत्व में किया गया। एसोसिएशन के महासचिव प्रभांक ठाकुर ने बताया कि सदस्यों को कर कानूनों में बदलाव, नए प्रावधानों और तकनीकी नवाचारों की जानकारी देने के लिए समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाते हैं।

समिट में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, धमतरी, राजनांदगांव और जांजगीर-चांपा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जीएसटी कानून, कर अनुपालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की गई।

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