छोटे पौधों और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को नुकसान से बचाने की सीख
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने वन प्रबंधन को बेहतर बनाने, गुणवत्तापूर्ण काष्ठ तैयार करने और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कवर्धा के सिंगपुर बीट में एक दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इसमें मैदानी अमले और श्रमिकों को वृक्षों के वैज्ञानिक पातन यानी कटाई तथा लट्ठे तैयार करने की उन्नत तकनीकों का जंगल में प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया गया।
लॉगिंग प्लान के पालन पर जोर
कार्यशाला में बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण लकड़ी तैयार करने और उपलब्ध काष्ठ का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने निर्धारित लॉगिंग प्लान का शत-प्रतिशत पालन करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, लकड़ी की लंबाई और तय श्रेणी के अनुसार कटाई एवं छंटाई करने की तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि काष्ठ की गुणवत्ता बनी रहे और निगम के राजस्व में वृद्धि हो सके।
श्रमिक सुरक्षा और वन संरक्षण पर विशेष ध्यान
प्रशिक्षण के दौरान वृक्षों की कटाई के समय श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े उपायों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि काष्ठ निष्कासन के दौरान आसपास मौजूद छोटे पौधों और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को नुकसान से कैसे बचाया जाए। वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से वन संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन करने पर विशेष जोर दिया गया।
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक अमरनाथ प्रसाद के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में क्षेत्रीय महाप्रबंधक राम अवतार दुबे, मंडल प्रबंधक राम कुमार सिदार सहित अन्य अधिकारी, कूप प्रभारी और मैदानी श्रमिक शामिल हुए। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य काष्ठ निष्कासन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।