इस बार मदिरा प्रेमियों के लिए दिवाली भी होली जैसी रही। शराब दुकानों में तो जमकर खरीदी हुई। दिवाली के दो दिन में ही 8 करोड़ से अधिक की शराब बिक गई। दुकानों से शराब बिकने के अलावा शहर से लेकर गांव तक अवैध  भी बड़े पैमाने पर हुई।

आम दिनों की अपेक्षा दिवाली में 20 फीसदी से अधिक शराब बिक्री हुई है। दूसरी ओर अवैध बिक्री भी जमकर हुई। सूत्रों के मुताबिक शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में कोचियों ने बेखौफ होकर शराब बेचा, तो शहर में कई बार और होटलों से अवैध रूप से सप्लाई हुई। इस अवैध कारोबार पर आबकारी विभाग रोक नहीं लगा पाया। शराब की खपत बढ़ने की वजह त्योहार और लगातार छुट्टियां होना भी ग्रामीण इलाकों में देसी शराब की खपत ज्यादा हुई। रायपुर से लगे ग्रामीण इलाकों में देसी मसाला और प्लेन की मांग ज्यादा रहती है। बताया जाता है कि सामान्य दिनों में करीब 5 करोड़ का कारोबार होता है, लेकिन दिवाली के दो दिन में यह 7 से 8 करोड़ का हो जाता है। इसकी बड़ी वजह अधिक मात्रा में शराब खरीदना है। इसके अलावा कोचिए भी सक्रिय रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक शराब दुकानों से कोचिए बड़ी मात्रा में शराब खरीदते हैं, फिर उसे गांव-गांव में अधिक कीमत में बेचते हैं। इसकी जानकारी शराब दुकान के सेल्समेन और मैनेजरों को रहती है। इसके बावजूद आबकारी विभाग के अधिकारी एक्शन नहीं लेते हैं।
शहर में एक बड़ा खेल चल रहा है। कई होटल, पब, कैफे और रेस्टोरेंट वाले आबकारी विभाग से एक दिन शराब पीलाने का लाइसेंस लेते हैं, लेकिन पूरे सप्ताह तक शराब परोसते हैं। यही वजह है कि इन होटलों और रेस्टोरेंट में पूरे सप्ताह भर देर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। लाइसेंस जारी करने के बाद आबकारी विभाग की टीम ने होटलों, पब, कैफे और रेस्टोरेंटों में जांच करने नहीं जाती है। इनके स्टॉक रजिस्टर के अलावा बिक्री की भी जांच नहीं करते हैं।
शराब की अवैध बिक्री के संबंध में विभाग का पक्ष जानने के लिए आबकारी उपायुक्त रामकृष्ण मिश्रा को कई बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। उन्हें मैसेज भी किया गया। इसका भी जवाब नहीं आया।

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