छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत राजस्व प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। इस पहल से राज्य के भू-स्वामियों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने से मुक्ति मिली है। ‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के 20,298 गांवों के खसरा और 19,723 गांवों के भू-नक्शों का कंप्यूटरीकरण पूरा कर लिया गया है।
इसके साथ ही, राज्य की 158 तहसीलों में ‘मॉडर्न रिकॉर्ड रूम’ तैयार किए गए हैं, जिससे कागजातों के गुम या खराब होने की आशंका समाप्त हो गई है।
डिजिटल राजस्व सेवा के प्रमुख बिंदु:
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ऑटो नामांतरण प्रणाली: 105 उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों को भुईयां पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे जमीन की रजिस्ट्री होते ही नया नामांतरण अपने आप शुरू हो जाता है।
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ई-कोर्ट से त्वरित समाधान: भूमि विवादों के निपटारे के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था लागू की गई है। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और सुनवाई (पेशी) की जानकारी एसएमएस से पा सकते हैं।
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15 दिनों में ऑटो व्यपवर्तन: भूमि उपयोग परिवर्तन (Land Diversion) की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए महज 15 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
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डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका: पटवारी और उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर वाली ऋण पुस्तिका पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध हो रही है, जिसे भविष्य में सिविल कोर्ट से भी जोड़ा जाएगा।
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व्हाट्सएप बॉट सुविधा: अब नागरिक अपने खसरा और बी-1 जैसे जरूरी दस्तावेज सीधे व्हाट्सएप चैटबॉट से आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।