रायपुर, झीरम घाटी मामले में एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर मंथन किया। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में हुई बैठक में तय किया गया कि फैसले के खिलाफ उच्च अदालत का रुख करने से पहले वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों से राय ली जाएगी। एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर को मामले में 10 आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया था।
बैठक में यह भी तय हुआ कि पूरे घटनाक्रम और अदालत के फैसले की जानकारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दी जाएगी। पार्टी नेतृत्व से आगे की रणनीति को लेकर मार्गदर्शन लेने की बात भी कही गई।
कांग्रेस ने झीरम मामले की जांच से जुड़े अपने सवालों और कथित जांच खामियों को लेकर दिल्ली में पत्रकारवार्ता करने का भी फैसला लिया है। पार्टी का कहना है कि हमले के पीछे कथित षड्यंत्र से जुड़े पहलुओं की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए।
दीपक बैज बोले- फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि झीरम घाटी मामले में एनआईए की जांच और अदालत के फैसले से कांग्रेस को पूरा न्याय मिलने का अहसास नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 25 मई 2013 को हुए हमले में कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोया था और पार्टी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की सच्चाई सामने लाने की मांग करती रही है। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे।
बैज ने आरोप लगाया कि जांच में षड्यंत्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त रूप से नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान गठित एसआईटी के जरिए मामले की आगे जांच की मांग पार्टी करती रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा पर भी मामले की जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। दूसरी ओर, झीरम मामले में एनआईए की आधिकारिक केस जानकारी के अनुसार जांच एजेंसी ने 2014 और 2015 में आरोपपत्र दाखिल किए थे और फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी रहने की बात दर्ज है।
कांग्रेस की बैठक में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर विधि विशेषज्ञों की राय लेने, पार्टी नेतृत्व को पूरे मामले की जानकारी देने और दिल्ली में पत्रकारवार्ता के जरिए अपना पक्ष रखने पर सहमति बनी है। वहीं, अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की प्रक्रिया आगे उच्च अदालत में तय होगी। पीड़ित परिवारों की ओर से भी एसआईटी और आगे की जांच की मांग सामने आई है।