नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से रोजगार के अवसरों को बढ़ावा, 50 हजार से अधिक युवाओं को मिला नियोजन रायपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में कौशल विकास और पुनर्वास के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित माओवादियों और प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अब तक 2,323 पुनर्वासितों को विभिन्न रोजगारोन्मुखी व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस पहल का उद्देश्य पुनर्वासितों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। प्रशिक्षण के तहत युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर, वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे कार्यों में दक्ष बनाया जा रहा है।

नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से रोजगार के अवसर

दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के माध्यम से कौशल विकास और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के तहत 10 जिलों में अब तक 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 50 हजार 53 युवाओं को नियोजित किया गया है। इनमें आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के हितग्राही भी शामिल हैं।

प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार की राह

प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बीजापुर में कुछ युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री और सिलाई कार्य के अवसर मिले हैं। वहीं बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को सुरक्षा सेवाओं, कृषि और श्रम कार्यों से जोड़ा गया है। इससे पुनर्वासितों को आय के साधन विकसित करने में मदद मिल रही है।

पुनर्वास केंद्रों में भी मिलेगी प्रशिक्षण सुविधा

बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर शामिल हैं। इसके अलावा प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बीजापुर में असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम के तहत 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए 780 लाख रुपये का प्रावधान भी किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। कौशल विकास और पुनर्वास की इन पहलों से बस्तर में युवाओं को आजीविका के नए विकल्प उपलब्ध कराने तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

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