सर्वेयरों के मानदेय के लिए 23.33 करोड़ रुपये आवंटित, अब तक 47.54 प्रतिशत राशि खर्च होने की जानकारी

रायपुर, डिजिटल क्रॉप सर्वे में काम करने वाले सर्वेयरों के मानदेय भुगतान में देरी का मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तक पहुंच गया है। बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम रेंगाडबरी निवासी सत्यानंद नायक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में किए गए सर्वे कार्य का भुगतान नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मानदेय के लिए 23.33 करोड़ रुपये का आवंटन

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, एग्रीस्टैक परियोजना के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे में लगे सर्वेयरों के मानदेय भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 2,333.33 लाख रुपये यानी करीब 23.33 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि दो किस्तों में जारी की गई। पहली किस्त में 1,399.99 लाख रुपये और दूसरी किस्त में 933.33 लाख रुपये का प्रावधान किया गया।

विभागीय पत्र में उपलब्ध विवरण के अनुसार, कुल आवंटित राशि में से 1,109.16 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। यह कुल आवंटन का 47.54 प्रतिशत है। शेष राशि के उपयोग और सर्वेयरों के लंबित मानदेय भुगतान की स्थिति का नियमानुसार परीक्षण किया जाना है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज हुई शिकायत

सत्यानंद नायक ने शिकायत में बताया कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य किया था, लेकिन इसके लिए निर्धारित मानदेय का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग ने उपलब्ध अभिलेखों और आवंटित राशि से संबंधित विवरण के आधार पर प्रकरण की जांच की प्रक्रिया शुरू की है।

विभाग ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत में उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में शिकायतकर्ता के लंबित भुगतान की वास्तविक राशि और भुगतान की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं है। ऐसे में प्रकरण का अंतिम निराकरण विभागीय जांच और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

भुगतान और शिकायतों के निराकरण पर जोर

डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से कृषि भूमि और फसलों से संबंधित जानकारी डिजिटल रूप में संकलित की जाती है। इस कार्य में सर्वेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उनके मानदेय का समय पर भुगतान और लंबित शिकायतों का निराकरण जरूरी है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनका परीक्षण कराया जाता है। इस मामले में भी कृषि विभाग ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब संबंधित अधिकारियों की जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद ही शिकायत के निराकरण तथा लंबित मानदेय भुगतान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

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