रायपुर, कभी नक्सल हिंसा और भय की खबरों से पहचाने जाने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी सामने रख रहा है। इसी बदलाव को करीब से देखने और समझने के लिए दिल्ली से 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स बस्तर पहुंचे। भ्रमण के दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता के साथ सामाजिक बदलाव, स्थानीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की गतिविधियों को भी करीब से देखा।
इंफ्लुएंसर्स ने नेतानार स्थित शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा का भ्रमण किया, जहां महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से संवाद कर उनके अनुभव और स्वरोजगार से जुड़ने के बाद आए बदलावों की जानकारी ली। महिलाओं के लिए यह प्रशिक्षण आर्थिक रूप से सशक्त बनने और परिवार की आय में योगदान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
भ्रमण के दौरान इंफ्लुएंसर्स ने शहीद वीर गुंडाधुर के जीवन, योगदान और बस्तर के इतिहास में उनके महत्व की भी जानकारी ली। ऐतिहासिक विरासत के साथ वर्तमान में संचालित स्वरोजगार गतिविधियों ने उन्हें बस्तर की बदलती तस्वीर से परिचित कराया। स्थानीय लोगों से संवाद और क्षेत्र की संस्कृति को करीब से जानने का भी उन्हें अवसर मिला।
दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स अब अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बस्तर के इस अनुभव को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे। उनके कंटेंट में बस्तर के पर्यटन स्थलों के साथ स्थानीय संस्कृति, इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य और बदलते सामाजिक परिवेश की झलक देखने को मिलेगी। प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित ये डिजिटल कहानियां बस्तर की मौजूदा तस्वीर को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं।
बस्तर की पहचान अब उसके इतिहास और चुनौतियों के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन और स्थानीय लोगों की आत्मनिर्भरता से भी जुड़ रही है। नेतानार में महिलाओं के हाथों में हुनर और स्वरोजगार की गतिविधियां इस बदलाव का एक मानवीय पक्ष सामने रखती हैं। इंफ्लुएंसर्स का यह दौरा इसी बदलते बस्तर की कहानी को डिजिटल माध्यम से सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।