सुकमा के दूरस्थ और वनांचल इलाकों में सौर ऊर्जा अब ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा बनती जा रही है। गांवों में रात के अंधेरे को दूर करने के लिए सोलर हाईमास्ट लगाए गए हैं, वहीं सोलर पंपों के जरिए पेयजल और सिंचाई की सुविधा भी मजबूत हो रही है। जिले में 71 सोलर हाईमास्ट, 672 सोलर पंप और सौर सुजला योजना के तहत 4,300 सोलर पंप इस बदलाव की तस्वीर सामने रखते हैं।

नियद नेल्लानार योजना के तहत सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेंदा और तोकनपल्ली समेत अलग-अलग गांवों और नगरीय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट लगाए जा चुके हैं। 8 अन्य हाईमास्ट की स्थापना का काम भी जारी है। इनकी रोशनी से शाम के बाद ग्रामीणों का आवागमन, बाजार और सार्वजनिक गतिविधियां पहले से आसान हुई हैं।

सौर ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं के रखरखाव पर भी काम किया जा रहा है। सुशासन तिहार के दौरान मिली शिकायतों के आधार पर खराब सोलर हाईमास्ट की एलईडी लाइट और बैटरियां बदली गईं। इससे बंद पड़ी लाइटें दोबारा चालू हुईं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी की सुविधा बहाल हुई।

पेयजल के मोर्चे पर भी सौर ऊर्जा उपयोगी साबित हो रही है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के अलग-अलग गांवों में 672 सोलर पंप लगाए गए हैं। इनसे दूरस्थ इलाकों में पेयजल व्यवस्था को बिजली की उपलब्धता से जोड़ा गया है। गांव में ही पंप के जरिए पानी मिलने से लोगों को दूर स्थित जलस्रोतों तक जाने की जरूरत कम हुई है, जिससे समय और श्रम की बचत हो रही है।

कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का असर और ज्यादा सीधा दिखाई देता है। सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में सुकमा जिले में 4,300 सोलर पंप किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 पंपों का लक्ष्य भी पूरा किया गया। इन पंपों के जरिए किसान उपलब्ध जलस्रोतों से खेतों तक पानी पहुंचाकर सिंचाई की जरूरत पूरी कर रहे हैं।

इसके अलावा कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना भी स्वीकृत है। इस तरह सुकमा में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल सिर्फ रोशनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पेयजल और खेती जैसी बुनियादी जरूरतों से भी जुड़ रहा है।

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