सेवा संकल्प अभियान के तहत गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिले में स्कूली बच्चों की रचनात्मकता ने विकसित भारत की तस्वीर पेश की। जिले के 905 शासकीय और निजी स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं गौरेला में छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक और रंगोली के जरिए लोगों को युवा शक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया।
गौरेला के रानी दुर्गावती चौराहे के पास ITI गौरेला और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के जरिए युवाओं की भूमिका और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को सामने रखा। अभिनय के माध्यम से शिक्षा, कौशल, मेहनत, अनुशासन और नवाचार को देश की प्रगति से जोड़ते हुए विद्यार्थियों ने युवाओं को अपनी क्षमताओं का उपयोग करने का संदेश दिया।
नाटक में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया गया। छात्राओं ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए युवाओं को उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। प्रस्तुति के दौरान मेहनत, एकता और भाईचारे जैसे सामाजिक मूल्यों को भी रेखांकित किया गया।
रंगोली में स्वच्छता और पर्यावरण का संदेश
नुक्कड़ नाटक के साथ छात्राओं ने रंगोली के जरिए भी सामाजिक सरोकारों को सामने रखा। रंगोली में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को रचनात्मक आकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों ने पानी और बिजली की बचत के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश भी दिया।
905 स्कूलों में ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’
‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ थीम पर जिले के सभी 905 स्कूलों में ड्रॉइंग और भाषण प्रतियोगिताएं कराई गईं। बच्चों ने अपनी कल्पना को चित्रों और शब्दों के जरिए सामने रखा। ड्रॉइंग में स्वच्छ और सुंदर भारत, हरित पर्यावरण, आधुनिक शिक्षा, तकनीकी विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकता जैसे विषय दिखाई दिए।
भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने शिक्षा, युवा शक्ति, नवाचार, कौशल विकास, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को विकसित भारत की दिशा में जरूरी बताया। बच्चों ने अपने विचारों के जरिए ऐसे भारत की कल्पना रखी, जो तकनीक में आगे होने के साथ प्रकृति और सामाजिक सद्भाव को भी महत्व देता हो।
बच्चों के सपनों में दिखा भविष्य का भारत
इन गतिविधियों ने बच्चों को सिर्फ प्रतियोगिता का मंच नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने विचार खुलकर रखने का अवसर भी मिला। नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग और भाषण के जरिए विद्यार्थियों ने सेवा, जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण को लेकर अपनी सोच साझा की।
जिले के 905 स्कूलों में हुई विद्यार्थियों की भागीदारी से अभियान को व्यापक स्तर मिला। बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुतियों में स्वच्छता, पर्यावरण, शिक्षा, तकनीक और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों के साथ भविष्य के भारत को लेकर उनकी कल्पना भी नजर आई।