रायपुर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसी क्रम में, गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों की विकास यात्रा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि की तस्वीर बदल दी है। राज्य निर्माण के बाद जिले में सिंचाई क्षमता 4,458 हेक्टेयर से बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है।
1. राज्य गठन के समय सीमित थीं सिंचाई सुविधाएं
1 नवंबर 2000 से पूर्व GPM जिले में जल संसाधन अधोसंरचना काफी सीमित थी:
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कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं (17 जलाशय, 4 व्यपवर्तन योजनाएं, 2 स्टॉप डेम और 5 एनीकट)।
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इन परियोजनाओं से मात्र 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी, जिसके कारण कृषि मुख्यतः मानसूनी वर्षा पर निर्भर थी।
2. पिछले 25 वर्षों में 57 नई परियोजनाओं का निर्माण
राज्य गठन के बाद सरकार ने चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया:
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पिछले 25 वर्षों में 57 नई परियोजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया, जिससे कुल योजनाओं की संख्या बढ़कर 85 हो गई है।
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पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार किया गया और दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुँचाया गया।
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कम पानी में अधिक सिंचाई के लिए माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप और डिजिटल तकनीक आधारित जल वितरण की निगरानी जैसे नवाचार अपनाए गए।
3. सिंचाई क्षमता में छह गुना से अधिक की वृद्धि
जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का सबसे बड़ा प्रमाण GPM की सिंचाई क्षमता में दिखता है:
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राज्य गठन के समय सिंचाई क्षमता 4,458 हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है।
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इन 25 वर्षों में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जो कि प्रारंभिक क्षमता का छह गुना से अधिक है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार
खेतों में पानी की निरंतर उपलब्धता से किसानों को बहुफसलीय खेती करने और स्थानीय स्तर पर कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर मिला है। ग्राम देवरगांव का मलनिया जलाशय, ग्राम आंदुल का जोगीडोंगरी जलाशय और ग्राम बनझोरका का एनीकट जिले की प्रमुख जल संरचनाएं हैं, जो जल संरक्षण के सफल प्रयासों को दर्शाती हैं।
भविष्य की योजनाओं के तहत, वर्तमान में कई नई सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनके पूरा होने से कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह 25 वर्षों की विकास यात्रा केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त गाथा है।