रायपुर : छत्तीसगढ़ के गांवों और वनांचल में मौजूद खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण का विस्तार कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने यह बात छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी और जनरल काउंसिल की बैठक में कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का जरिया हैं। सरकार का फोकस केवल खेल सुविधाएं बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर भी है।

रायपुर और जशपुर में आर्चरी अकादमी पर जोर

खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के तहत रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। रायपुर में करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी तैयार की जा रही है। वहीं जशपुर के पंडरापाठ में करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है। इससे जशपुर और आसपास के वनांचल के खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है।

बस्तर और सरगुजा की प्रतिभाओं पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की बड़ी संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरदराज के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है और इसे हर साल आयोजित करने की बात कही गई। सरगुजा ओलंपिक के जरिए भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे आने का अवसर मिल रहा है। खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है।

खेल संघों को उद्योगों से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल तेज करने की बात कही। उनका कहना है कि उद्योगों के सहयोग से खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों, प्रतियोगिताओं और खेल अधोसंरचना के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं। साथ ही शासन और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के बीच बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी देने की बात भी कही गई।

40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी पर नजर

बैठक में छत्तीसगढ़ में 40वें नेशनल गेम्स कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की दिशा में आगे बढ़ने का समय है। अगर छत्तीसगढ़ को मेजबानी मिलती है तो बस्तर को भी आयोजन से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी की मजबूत परंपरा है और यहां के खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण व उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत है। उन्होंने बस्तर के जनजातीय युवाओं की मलखम्ब में प्रतिभा का भी उल्लेख किया।

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