अंबिकापुर : रक्षाबंधन के त्योहार ने सरगुजा की महिलाओं के लिए सिर्फ राखी बनाने का मौका नहीं, बल्कि अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी खोल दिया है। अंबिकापुर विकासखंड के किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर और आसपास उपलब्ध सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं।
समूह की महिलाएं चावल, गेहूं, मक्का और कोहड़े के बीजों को रंगकर और सजाकर राखियों में इस्तेमाल कर रही हैं। इसके साथ रेशमी धागे, ऊन और दूसरी सजावटी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल से राखियों की लागत कम रखने में मदद मिल रही है।
12 महिलाओं ने मिलकर शुरू किया काम
जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह में कुल 12 महिलाएं हैं। समूह की सदस्य सोनाली सिंह के मुताबिक महिलाएं त्योहार और मौसम के हिसाब से अलग-अलग काम चुनती हैं। फिलहाल पूरा समूह राखी बनाने में जुटा है।
तैयार राखियों को स्थानीय स्तर पर स्टॉल लगाकर और घर से बेचा जा रहा है। मांग बढ़ने पर महिलाएं मिलकर उत्पादन भी बढ़ा रही हैं।
घरेलू सामान से तैयार हो रहे अलग-अलग डिजाइन
समूह की सदस्य दीप्ति चौधरी बताती हैं कि राखियां बनाने के लिए पुराने बीज, चावल, गेहूं और मक्के के दानों को रंगकर अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसके बाद धागे, ऊन और सजावटी सामग्री से उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है।
महिलाएं अपने खाली समय में एक साथ बैठकर राखियां तैयार करती हैं। इस तरह घरेलू जिम्मेदारियों के साथ वे अपने हुनर को कमाई के साधन में बदल रही हैं।
तीन साल से सीजनल काम कर रहा समूह
समूह की सदस्य आशा रवि के अनुसार, महिलाएं करीब तीन वर्षों से त्योहारों और मौसम के हिसाब से अलग-अलग गतिविधियां कर रही हैं। राखी निर्माण भी इसी सीजनल काम का हिस्सा है।
बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को प्रशिक्षण और आजीविका की नई गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला। इससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी।
एक काम पर निर्भर नहीं, पूरे साल नए अवसर
जय मां दुर्गा समूह की महिलाएं पूरे साल एक ही काम पर निर्भर रहने के बजाय मौसम और त्योहार के अनुसार गतिविधियां बदलती हैं। सामूहिक रूप से काम करने से उत्पादन से लेकर बिक्री तक एक-दूसरे का सहयोग मिलता है।
राखी बनाने का यह काम भी इसी सोच का हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर महिलाएं कम लागत में उत्पाद तैयार कर रही हैं और उन्हें बाजार तक पहुंचा रही हैं।
राखी के साथ आत्मनिर्भरता का संदेश
किशुन नगर की इन महिलाओं के लिए राखियां अब सिर्फ रक्षाबंधन की सजावटी वस्तु नहीं हैं। इनके जरिए वे अपने हुनर को पहचान और परिवार की आय में अपना योगदान दे रही हैं।
महिलाओं ने बिहान के जरिए आजीविका के अवसर मिलने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने और अपने हुनर को काम में बदलने का अवसर मिला है।
इन महिलाओं की पहल यह दिखाती है कि घर और गांव में उपलब्ध छोटी-छोटी चीजों का रचनात्मक इस्तेमाल भी कमाई का जरिया बन सकता है। रक्षाबंधन के लिए तैयार हो रही ये राखियां महिला आत्मनिर्भरता की एक छोटी लेकिन खास तस्वीर पेश कर रही हैं।