रायपुर,  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की गीदम प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति ने तेंदूपत्ता विक्रय में नया इतिहास रचते हुए 38 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा 16 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति के तेंदूपत्ते को 10,909 रुपये प्रति मानक बोरा तक की ऐतिहासिक कीमत प्राप्त हुई।

ऑनलाइन निविदा में गीदम समिति के तेंदूपत्ते की बिक्री 10,609 रुपये और 10,909 रुपये प्रति मानक बोरा की रिकॉर्ड दर पर हुई। यह समिति के गठन के बाद से अब तक की सर्वाधिक विक्रय दर है, जिससे क्षेत्र के हजारों तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

करीब 4 हजार संग्रहक परिवारों को मिलेगा बोनस

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रिकॉर्ड मूल्य पर तेंदूपत्ता बिकने से समिति को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसका लाभ समिति से जुड़े लगभग 4 हजार तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को बोनस के रूप में मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे वनाश्रित परिवारों की आय में वृद्धि होगी और उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।

ऑनलाइन निविदा से बढ़ी पारदर्शिता

वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। इससे तेंदूपत्ता का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ है, जिसका लाभ सीधे संग्रहकों तक पहुंचेगा।

डिजिटल व्यवस्था से समयबद्ध भुगतान

राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा तथा अन्य लघु वनोपज योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संग्रहकों के बैंक खातों में राशि सीधे जमा की जा रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध बनी है।

सामूहिक प्रयासों का परिणाम

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी, जिला लघु वनोपज सहकारी संघ, गीदम समिति के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों तथा सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपज आधारित आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी, ताकि भविष्य में भी तेंदूपत्ता एवं अन्य लघु वनोपज से जुड़े परिवारों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

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