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अगर बड़ा और अच्छा इंसान बनना है तो हर दिन मां के पांव छूने से शुरुआत करें। मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं, मां वह शक्ति है, जो आत्मा को जीवन देती है। मां कोई संस्था नहीं, वह स्वयं एक विश्वविद्यालय है, जिसके पाठ्यक्रम में प्रेम, त्याग, सेवा और करुणा जैसे पाठ बिना शब्दों के पढ़ाए जाते हैं। मां ही पहला संबंध है, जो पद देखती है, न पैसा। मां को न कोई सिलेबस चाहिए, न उपाधि। वह हर दिन गढ़ती है। बच्चों को सांचे में ढालती है। ऐसे देवत्व को समझे बिना हम जीवन का अर्थ ही नहीं समझ सकते।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी शनिवार को सिविल लाइंस स्थित होली हार्ट्स स्कूल में आयोजित ‘दिशा-बोध’ कार्यक्रम के तहत बच्चों, युवाओं और महिलाओं से संवाद कर रहे थे। उनका वक्तव्य केवल व्यायान नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन की आत्मा से निकली वेदना और चेतना का एक भावपूर्ण संप्रेषण था।
गुलाब कोठारी ने जीवन की सबसे सच्ची बात बच्चों को बताई, मां कभी कुछ नहीं मांगती, वह सिर्फ देती है। आप भी देना सीखो। जो देता है, वह समाज और देश गढ़ता है। उन्होंने आह्वान किया कि इस देश ने आपको जन्म दिया है। यह देश आपकी मां है। उसके लिए कुछ करके जाइए। तभी जीवन सार्थक होगा। रायपुर के होली हार्ट्स स्कूल में शनिवार को आयोजित दिशा बोध कार्यक्रम में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के संबोधन को सुनतीं छात्राएं।
कार्यक्रम की शुरुआत में ही कोठारी ने एक गहरी बात कही, अगर किसी के पास ‘होली हार्ट’ है, यानी पवित्र हृदय है, तो वह जीवन में किसी भी लक्ष्य तक पहुंच सकता है। मां उसी ‘होली हार्ट’ की सबसे बड़ी प्रतीक है।’’ उन्होंने कहा, मां सिर्फ जननी नहीं, सृजनकर्ता है। आत्मा को जो शरीर देती है, वह मां है। मां के बिना आत्मा भी अधूरी है।
गुलाब कोठारी ने बच्चों को आधुनिक दौर की सबसे बड़ी भूल समझाई। सोशल मीडिया और इंटरनेट सिर्फ जानकारी दे सकते हैं, संवेदना नहीं। भावनाएं न हों, तो कोई भी रिश्ता टिक नहीं सकता। भावनाएं वहीं पलती हैं, जहां मां होती है। उन्होंने कहा कि घर का खाना सिर्फ शरीर नहीं, आत्मा को भी तृप्त करता है। पिज्जा, बर्गर और पास्ता से शरीर पलता है, मन नहीं।

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