प्रदेश के तीन जिलों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। इनमें राजनांदगांव, कबीरधाम के साथ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला शामिल हैं। तीनों ही जिला राजनांदगांव पुलिस रेंज में आते हैं। रेंज आईजी दीपक कुमार झा ने कहा कि क्षेत्र में नक्सलियों की संख्या काफी कम हुई है।

मार्च 2026 तक नक्सलियों को इस क्षेत्र से पूरी तरीके से खत्म कर देंगे। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की पीईबी के वेबसाइट में तीनों जिलों को नक्सल मुक्त करने का उल्लेख किया गया है, लेकिन अभी तक केंद्र से इस संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

अविभाजित राजनांदगांव में 1992 में सक्रिय हुए थे लाल आतंकी

प्रदेश के जिन तीन जिलों को नक्सलवाद मुक्त घोषित किया गया है, वे सभी अविभाजित राजनांदगांव का हिस्सा हैं। राजनांदगांव में 1992 में नक्सली सक्रिय हुए थे। इस जिला की सीमा एक तरफ महाराष्ट्र के धुर नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली से लगती है तो दूसरी सीमा तेलंगाना से लगे बस्तर संभाग से जुड़ी है।

1992 में बकरकट्टा क्षेत्र में नक्सलियों ने पहली घटना को अंजाम दिया था। लगभग 35 सालों में नक्सली यहां कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। इनमें 2009 का मानपुर मुठभेड़ भी शामिल है, जिसमें एसपी समेत 29 जवान शहीद हो गए थे।

अब केवल 4 जिले अतिसंवेदनशील

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के केवल चार जिले अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रह गए हैं। इनमें बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा शामिल हैं। वहीं, नक्सल प्रभावित जिलों में दंतेवाड़ा, गरियाबंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी शामिल हैं।

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