अंबिकापुर के ग्राम डिगमा में रहने वाला 17 वर्षीय महेश सिंह जो बचपन से ही दिव्यांग है. महेश का एक हाथ नहीं है और दूसरा हाथ अविकसित है. महेश को पढऩे का जुनून है इसलिए हाथ ना होते हुए भी बचपन से पढ़ाई के लिए अपने पैरों को ही सहारा बना लिया है
अंबिकापुर के ग्राम डिगमा में रहने वाला 17 वर्षीय महेश सिंह जो बचपन से ही दिव्यांग है. महेश का एक हाथ नहीं है और दूसरा हाथ अविकसित है. महेश को पढऩे का जुनून है इसलिए हाथ ना होते हुए भी बचपन से पढ़ाई के लिए अपने पैरों को ही सहारा बना लिया है