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इरशाद अली ने बताया कि कॉटन के दो मीटर कपड़े पर उन्होंने हनुमान चालीसा लिखा है. इसमें उन्हें लगभग चार दिन का वक्त लगा है. इरशाद ने हनुमान चालीसा को लिखने से पहले उसे पढ़ा और समझा है. उसके बाद उन्होंने इसकी चौपाइयों को कपड़े पर उकेरा है. इस कपड़े के चारों तरफ नारंगी रंग की बनारसी साड़ी की कोटिंग है जिसमें कमल का फूल बना हुआ है

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