ग्रामीणों की मान्यता है कि वर्षों पहले यहां से गुजर रहे बारातियों समेत दूल्हा-दुल्हन का पूरा परिवार पत्थरों में बदल गया. कारण कोई नहीं जानता, लेकिन कहा जाता है कि तभी से इस गांव में होने वाली शादियों में दुल्हन को पौ फटने से पहले ही विदा कर दिया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि करीब 100 साल पहले यह अनोखी घटना घटित हुई थी .
ग्रामीणों की मान्यता है कि वर्षों पहले यहां से गुजर रहे बारातियों समेत दूल्हा-दुल्हन का पूरा परिवार पत्थरों में बदल गया. कारण कोई नहीं जानता, लेकिन कहा जाता है कि तभी से इस गांव में होने वाली शादियों में दुल्हन को पौ फटने से पहले ही विदा कर दिया जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि करीब 100 साल पहले यह अनोखी घटना घटित हुई थी .