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Farmer Producer Organization India

जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई के विकासखण्ड छुईखदान के ग्राम कोहलाटोला की निवासी श्रीमती बेदो बाई वर्मा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना रही हैं।

श्रीमती बेदो बाई वर्मा, पति श्री दीपक वर्मा, वर्ष 2018 में जय नथेला मईया स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जो फुलवारी ग्राम संगठन के अंतर्गत कार्यरत है तथा विद्या संकुल संगठन, छुईखदान से संबद्ध है। समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी और परिवार की आय मुख्य रूप से खेती पर ही निर्भर थी।
बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने समूह से ऋण लेकर कृषि कार्य को आगे बढ़ाया और नए अवसरों की तलाश शुरू की। वर्ष 2021 में उन्होंने स्वर्ण-उपज महिला किसान उत्पादक कंपनी (FPO) में शेयरधारक के रूप में जुड़कर एक नई पहल की। अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता के बल पर उन्होंने लगभग 950 महिला किसानों को भी इस कंपनी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद उन्हें FPO के खरीदी केंद्र संचालिका के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इस कार्य के लिए उन्हें वाइब्रो मशीन, वजन मापक मशीन, टैबलेट सहित अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए। वे किसानों से चना, सोयाबीन, मूंग एवं अरहर की बाजार मूल्य पर खरीदी करती हैं, जिससे उन्हें कमीशन के रूप में आय प्राप्त होती है। अब तक इस कार्य से उन्हें लगभग 2 लाख रुपये की कमीशन राशि प्राप्त हो चुकी है।

इसके अतिरिक्त वे अपने गांव में किराना दुकान का संचालन भी करती हैं, जिससे लगभग 3000 रुपये प्रतिमाह की आय होती है। साथ ही वे धान, सोयाबीन और चना की खेती भी करती हैं तथा घर के उपयोग के लिए जैविक सब्जी उत्पादन भी करती हैं।

विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से श्रीमती बेदो बाई वर्मा की आय में निरंतर वृद्धि हुई है। उन्हें खेती से लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये, खरीदी केंद्र संचालिका के रूप में लगभग 40 हजार रुपये, किराना दुकान से करीब 36 हजार रुपये, जैविक दवाई विक्रय से लगभग 12 हजार रुपये, कृषि सखी के मानदेय के रूप में लगभग 23 हजार रुपये तथा मास्टर ट्रेनर मानदेय के रूप में करीब 5 हजार रुपये की आय प्राप्त होती है। इन सभी स्रोतों से उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 2 लाख 66 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

भविष्य में श्रीमती बेदो बाई वर्मा मुर्गी पालन का कार्य भी प्रारंभ करने की योजना बना रही हैं, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होगी। अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

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