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छत्तीसगढ़ दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकंपा संघ ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संघ का कहना है कि दिवंगत पंचायत शिक्षक सरकार की बेरुखी और वादाखिलाफी से परेशान हो चुकी है. हम तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए अपनी अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकंपा संघ का कहना है कि सरकार उन्हें B ed, D ed और टीईटी के माध्यम से शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर नियुक्ति देने को तैयार है. पिछले महीने 16 अक्टूबर को सरकार ने कैबिनेट की बैठक में केवल 27 लोगों को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति दी है. लेकिन आज भी 1256 परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में अपना और अपने घर का भरण पोषण करना भी मुश्किल हो गया है.

पिछले महीने 16 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक हुई थी, उसमें B ed, d.Ed और टीईटी योग्यता रखने वाले 27 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति मिली है. प्रदेश के सभी लोगों को अनुकंपा नियुक्ति मिलने की बात मंत्री ने कही गई थी, लेकिन केवल 27 लोगों के साथ न्याय हुआ है. आज भी 1256 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है. ठीक से परिवार नहीं चल पा रहा हैं तो बीएड करने इतने पैसे कहां से लाएंगे. : अश्वनी सोनवानी, प्रदेश अध्यक्ष, छग दिवंगत पंचायत शिक्षक संघ

संघ ने मीडिया के जरिए सरकार से अपील किया है कि इन नियमों को सरकार संशोधित करते हुए उन्हें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति दे. दिवंगत पंचायत शिक्षक बाबू और चपरासी का काम भी करने को तैयार है. उनका कहना है कि आज के समय में बीएड करने में एक से डेढ़ लाख रुपए लगते हैं. वे परिवार ठीक से नहीं चला पा रहे हैं तो बीएड करने इतने पैसे कहां से लाएंगे.

हमें केवल तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में बाबू और चपरासी के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए. सरकार जल्द ही इस नियम को शिथिल नहीं करती है तो फिर से एक बार आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं. : राजेश्वरी दुबे, प्रदेश उपाध्यक्ष, छग दिवंगत पंचायत शिक्षक संघ

“परिवार का पालन पोषण करेंगे या फिर पढ़ाई करेंगे”: छत्तीसगढ़ दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकंपा संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश्वरी दुबे ने बताया कि सरकार ने जो शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की है, उसे पूरा कर पाना हमारे बस की बात नहीं है. हम अपना और अपना परिवार का पालन पोषण करेंगे या फिर पढ़ाई करेंगे. सालों से बच्चों को पढ़ाने लिखाने में दिक्कत हो रही है. 5 साल सरकार में रहने के बाद पार्टी बदल जाती है. ऐसे करते-करते कई साल गुजर गए.

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