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जिला शक्ति चंद्रपुर में मौजूद है मां चंद्रहासिनी और मां नाथलदाई का मंदिर. ऐसी मान्यता है कि भक्त यहां जो भी मुरादे मांगते हैं वो पूरी जरूर होती है रायगढ़ से 30 किलोमीटर दूर चित्रोत्पला गंगा महानदी के तट पर बसे चंद्रपुर पहाड़ी पर विराजमान हैं मां चंद्रहासिनी और नदी के बीच मौजूद हैं मां नाथलदाई. नवरात्रि के मौके पर मां चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है महानदी पखारती है देवियों के पांव यहां चंद्रहासिनी देवी और मां नाथलदाई का प्राचीन मंदिर है जहां, महानदी अपने जल से दोनों देवियों के पांव पखारती हैं तो, वहीं दूसरी ओर मांड नदी इलाके के लोगों के लिए जीवनदायिनी से कम नहीं है.

 

श्रद्धा का केंद्र है माता का मंदिर

ये मंदिर अंचल के देवी भक्तों के श्रद्धा का केंद्र है. माता रानी की प्रतिमा में सिंदूर, सुहाग, सृंगार, कुमकुम, गुलाल और बंदन चढ़ाया जाता है. इसके साथ ही नारियल और अगरबत्ती से माता की पूजा-अर्चना की जाती है. माता में भक्तों की आस्था इतनी प्रगाढ़ है कि वो दूर-दूर से दर्शन के लिए चले आते हैं.

 

लगती है भक्तों की भीड़

हर साल चैत, नवरात्र के वक्त यहां मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित करने के साथ ही मां चंद्रहासिनी मंदिर से कलश यात्रा निकाली जाती है. इस दौरान श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है. मां चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए दूसरे राज्यों के साथ-साथ विदेश से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं! यहां गिरा मां का बायां कपोल मान्यता के अनुसार माता सती का बायां कपोल महानदी के पास स्थित पहाड़ी में गिरा, जो आज बाराही मां चंद्रहासिनी मंदिर के रूप में जाना जाता है. मां की नथनी नदी के बीच टापू में जा गिरी, जिसे आज नाथलदाई मंदिर के नाम से जाना जाता है.

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