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Ayush department health camp

रजत जयंती महोत्सव अंतर्गत आयुष विभाग के द्वारा 10 से 17 अक्टूबर तक विशेष सप्ताह में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उसी क्रम में विकासखंड रामानुजनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामानुजनगर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परशुरामपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गणेशपुर में डॉक्टर सीमा त्रिपाठी, डॉक्टर आर.के. शुक्ला, डॉक्टर एस. के. त्रिपाठी के द्वारा सियान जतन ओपीडी में सियान जनों का जांच उपचार व सलाह दिया गया। साथ ही सियान जन उनके साथ आए परिजनों का प्रकृति परीक्षण कर प्रकृति बताया गया, आयुर्वेद फार्मासिस्ट अर्चना पांडे, भरत कंवर, प्रमोद कवर के द्वारा आयुर्वेद दवाई उपलब्ध कराई गई।

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ एस के त्रिपाठी ने बताया कि प्रकृति परीक्षण एक आयुर्वेदिक विधि है जो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक प्रकृति (वात पित्त और कफ के संयोजन) को निर्धारित करती है, यह परीक्षण व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुसार खान पान जीवन शैली और स्वास्थ्य संबंधी सलाह प्रदान करता है, जिससे वह भविष्य में होने वाली बीमारियों से बच सके, यह परीक्षण एक ऐप के माध्यम से भी किया जा सकता है। जिसमें प्रश्नों के उत्तर देने के बाद व्यक्ति को एक क्यू आर कोड और प्रकृति प्रमाण पत्र मिलता है ।

,,प्रकृति परीक्षण क्या है,, — आयुर्वेदिक सिद्धांत —  यह  आयुर्वेद के त्रिदोष सिद्धांत पर  आधारित है जिसके अनुसार शरीर वात पित्त और कफ नामक तीन प्रमुख दोषों से बना है परीक्षण यह बताता है कि किस व्यक्ति मे कौन सा दोष प्रमुख है, यह एक दो या तीन दोषों के संयोजन के आधार पर हो सकता है, परीक्षण के बाद व्यक्ति को उसकी विशेष प्रकृति के अनुसार स्वस्थ जीवन शैली खान पान और व्यायाम के बारे में सलाह दी जाती है ।

,, प्रकृति परीक्षण का महत्व ,,–
यह भविष्य की बीमारियों की आशंका को पहले से जानने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण है, व्यक्ति को अपनी प्रकृति के अनुरूप खान पान और जीवन शैली अपनाने में मदद करता है। शरीर के वात पित्त कफ दोषों को संतुलित रखने में सहायता करता है, जो स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

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