‘मैं अयोध्या हूं’ नाट्य प्रस्तुति ने दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक, शिल्पग्राम में पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी और कथक ने मोहा दर्शकों का मन
रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के दूसरे दिन नवा रायपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। मुख्य मंच पर नाटक, भक्ति संगीत और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। वहीं शिल्पग्राम में लोककला और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग बिखेरे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने कलाकारों को सम्मानित कर उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।
मुख्य मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत एक घंटे की नाट्य प्रस्तुति ‘मैं अयोध्या हूं’ से हुई। इसमें अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को अभिनय और कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाटक में भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपराओं और राम मंदिर निर्माण से जुड़े इतिहास की झलक देखने को मिली। कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराया।
सांस्कृतिक संध्या में पार्श्व गायिका स्वास्ति मेहुल की भक्तिमय प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्ति रस से भर दिया। ‘राम आएंगे’ गीत पर दर्शक झूमते नजर आए, वहीं ‘कान्हा आन बसो वृंदावन’ की प्रस्तुति ने कृष्ण भक्ति का रंग बिखेरा। इसके बाद छत्तीसगढ़ी पार्श्व गायिका कंचन जोशी ने अपने गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया। उनके छत्तीसगढ़ी गीतों पर श्रोता झूमते और तालियां बजाते नजर आए।
मुख्य मंच के साथ शिल्पग्राम में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहा। यहां 11 कार्यक्रमों के जरिए छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच की प्रस्तुतियां हुईं। प्रसन्ना अवस्थी ने लोकसंगीत एवं नृत्य और सुष्मिता दास ने ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया। दुर्ग की समप्रिया पूजा निषाद ने पंडवानी गायन के जरिए महाभारत की कथाओं को जीवंत किया, जबकि बिलासपुर के अंकित निर्मलकर ने सूफी, गजल और सुगम गायन से संगीत के अलग-अलग रंग पेश किए।
गरियाबंद की मिलवंतीन बाई ने पारंपरिक सुआ नृत्य की प्रस्तुति दी। मेघा बोस ताम्रकार ने लोकसंगीत सुनाया, वहीं आंचल पाण्डेय और विनीता त्रिपाठी ने कथक नृत्य के माध्यम से शास्त्रीय कला की झलक दिखाई। धमतरी की रुखमनी दीवान और तेजराम साहू ने लोकमंच के जरिए छत्तीसगढ़ी लोकजीवन और सामाजिक परंपराओं को प्रस्तुत किया। आदित्य मिश्रा बैंड की प्रस्तुति ने भी कार्यक्रम में संगीत का नया रंग जोड़ा।
राज्योत्सव के दूसरे दिन प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिला। पंडवानी और सुआ नृत्य जैसी पारंपरिक विधाओं के साथ शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा। इन आयोजनों के जरिए स्थानीय लोककलाओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास भी देखने को मिला।