दोनों महाविद्यालयों के लिए 66 पदों के सृजन को मंजूरी, घर के नजदीक मिलेगी कॉलेज की सुविधा; मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा- दूरी और आर्थिक स्थिति नहीं बनेगी पढ़ाई में बाधा
रायपुर, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के करेलीबड़ी और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सुहेला में नवीन शासकीय महाविद्यालय शुरू करने की तैयारी की जा रही है। राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में दोनों महाविद्यालयों के लिए कुल 66 पदों के सृजन को स्वीकृति दी है। इससे आसपास के गांवों के विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों को घर के नजदीक उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को कॉलेज की पढ़ाई के लिए अक्सर दूर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते हैं। कई बार दूरी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण बेटियों की आगे की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। नए महाविद्यालय शुरू होने से इन समस्याओं में कमी आएगी।
दोनों कॉलेजों के लिए 66 पद स्वीकृत
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, दोनों महाविद्यालयों के लिए स्वीकृत पदों में प्राचार्य, 12 सहायक प्राध्यापक, एक ग्रंथपाल, एक क्रीड़ाधिकारी, एक सहायक ग्रेड-01, पांच प्रयोगशाला तकनीशियन, एक सहायक ग्रेड-02, एक सहायक ग्रेड-03 और पांच प्रयोगशाला परिचारक के पद शामिल हैं।
इसके अलावा महाविद्यालयों के संचालन के लिए दो भृत्य, एक बुक लिफ्टर, एक स्वच्छक और एक चौकीदार की सेवाएं कलेक्टर दर पर सेवाप्रदाता के माध्यम से उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
बेटियों को पढ़ाई जारी रखने में मिलेगी मदद
मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना जरूरी है। आर्थिक स्थिति या कॉलेज की दूरी किसी भी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। करेलीबड़ी और सुहेला में महाविद्यालय खुलने से आसपास के गांवों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।
इस पहल से उन परिवारों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब तक बच्चों की कॉलेज शिक्षा के लिए दूसरे शहरों या दूरस्थ क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। नए महाविद्यालयों से ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने, बेटियों की पढ़ाई को प्रोत्साहित करने और स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक सुविधाएं बढ़ाने में मदद मिलेगी।