रायपुर, छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ विकास कार्यों को गति मिल रही है। इसी कड़ी में ग्राम चांगेर के 23 घर पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगाए हैं। आजादी के बाद लगभग आठ दशकों से बिजली की सुविधा से वंचित रहे इस गांव में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 25.21 लाख रुपये की लागत से विद्युतीकरण कराया गया है। कोण्डागांव जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित चांगेर भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण लंबे समय तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से दूर रहा। शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता था। बच्चों को पढ़ाई के लिए सीमित रोशनी का सहारा लेना पड़ता था और रात में आवागमन भी मुश्किल होता था। अब सभी 23 घरों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के जीवन में राहत मिलेगी।

बच्चों की पढ़ाई और घरेलू कामकाज होंगे आसान

गांव में बिजली पहुंचने से बच्चों को शाम के समय बेहतर रोशनी में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। घरेलू कामकाज में सुविधा बढ़ेगी और रात के समय आने-जाने में भी सहूलियत होगी। बिजली की उपलब्धता से संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ग्रामीणों के लिए यह बदलाव केवल घरों में बल्ब जलने तक सीमित नहीं है। बिजली की सुविधा से उनके दैनिक जीवन में सुधार और आधुनिक सुविधाओं तक पहुंच के नए रास्ते खुलेंगे।

25.21 लाख रुपये से हुआ विद्युतीकरण

जिला प्रशासन ने डीएमएफ मद से विद्युतीकरण कार्य के लिए 25.21 लाख रुपये खर्च किए। इस परियोजना के तहत गांव के सभी 23 घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। लंबे समय से इस सुविधा का इंतजार कर रहे ग्रामीणों में इसे लेकर खुशी है। उन्होंने बिजली पहुंचाने की पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही बुनियादी सुविधाएं

चांगेर में विद्युतीकरण दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करने के प्रयासों का हिस्सा है। माओवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में सुरक्षा की स्थिति में सुधार के साथ सड़क, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे प्रयासों का उद्देश्य दूरस्थ बस्तियों में रहने वाले परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। ग्राम चांगेर के घरों में जली बिजली की रोशनी ग्रामीणों के लिए लंबे इंतजार के बाद मिली सुविधा का प्रतीक है। इससे गांव में पढ़ाई, घरेलू गतिविधियों और बेहतर जीवन की संभावनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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