रायपुर, छत्तीसगढ़ में सड़क, भवन और अन्य सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का विकास अब भविष्य की जरूरतों और आर्थिक विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दीर्घकालिक योजना के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना पर होने वाला निवेश ऐसा हो, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिले और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप छत्तीसगढ़ में आधुनिक, टिकाऊ और मजबूत अधोसंरचना विकसित करना जरूरी है। परियोजनाओं का चयन केवल तात्कालिक जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि उनके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता मिले, जिनसे आवागमन, उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।
दो और चार लेन सड़कों की जरूरत का होगा सर्वे
प्रदेश में सड़क नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। इसमें यातायात का दबाव, बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और नए आर्थिक केंद्रों की आवश्यकताओं का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर तय होगा कि किन मार्गों को दो लेन और किन्हें चार लेन में विकसित करने की जरूरत है। इसी सर्वे के आधार पर दीर्घकालिक रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण क्षेत्रों, शहरों, औद्योगिक केंद्रों और बाजारों के बीच आवाजाही आसान होती है। इससे कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और निवेश को भी बढ़ावा मिलता है। इसलिए सड़क निर्माण को क्षेत्र के समग्र विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
बजट से निर्माण तक हर चरण की समय-सीमा
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परियोजना की योजना बनाने, बजट प्रावधान, प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति, निविदा, कार्यादेश तथा निर्माण पूरा होने तक प्रत्येक चरण की समय-सीमा तय की जाए। परियोजनाओं की नियमित समीक्षा हो और देरी के कारणों को समय रहते दूर किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्यों में समयबद्धता के साथ गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन भी जरूरी है। किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही सड़कों, भवनों और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नियमित निरीक्षण, रखरखाव और समय पर मरम्मत की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।
स्कूल-कॉलेज के भवनों में भी भविष्य की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक भवनों की डिजाइन तैयार करते समय भविष्य में बढ़ने वाली जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए। भवनों में संभावित विस्तार, सुरक्षा, सुगम पहुंच और रखरखाव जैसे पहलुओं को शुरुआती योजना में शामिल करने से आगे चलकर अतिरिक्त निर्माण पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है।
निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक, बेहतर निर्माण सामग्री और देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण तथा कौशल उन्नयन पर जोर दिया गया।
डिजिटल निगरानी से सुधरेगी कार्यप्रणाली
मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के तहत परियोजनाओं की योजना, वित्तपोषण, स्वीकृति, निर्माण, निगरानी और रखरखाव की प्रक्रियाओं में सुधार पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों की परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति पर नजर रखने के लिए एकीकृत डिजिटल व्यवस्था विकसित करने की योजना भी समीक्षा का हिस्सा रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधोसंरचना विकास से जुड़े विभाग साझा दृष्टिकोण के साथ काम करें, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और एक ही क्षेत्र में कार्यों की अनावश्यक पुनरावृत्ति रोकी जा सके। विकास की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि नई अधोसंरचना से नागरिकों का जीवन कितना आसान हुआ और आर्थिक गतिविधियों को कितनी गति मिली।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा लोक निर्माण, वित्त, नगरीय प्रशासन, सूचना एवं प्रौद्योगिकी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।