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छत्तीसगढ़ के इस गांव में हुआ कमाल! करोड़ों लीटर पानी बचेगा, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

Chhattisgarh Water Conservation

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम बरदर प्रकृति संरक्षण, जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका का एक उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य शासन के महत्वाकांक्षी “मोर गांव मोर पानी” महा अभियान के तहत यहां 52 एकड़ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ते हुए ऐसा समग्र विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय उदाहरण बनेगा। इस पहल के अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न वैज्ञानिक जल संरक्षण एवं भूजल संवर्धन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिससे प्रत्येक वर्ष करोड़ों लीटर वर्षा जल का संचयन और भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित होगी। वहीं शेष 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक उन्नत फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण कर फलोद्यान विकसित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने के साथ दर्जनों महिला स्व-सहायता समूहों को स्थायी रोजगार एवं नियमित आय का अवसर प्राप्त होगा।

ग्राम बरदर में जल संरक्षण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकसित किया गया है। सात एकड़ क्षेत्र में 30×40 मॉडल के तहत 240 संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनके माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख लीटर वर्षा जल का संग्रहण एवं भूजल रिचार्ज संभव होगा। इसके साथ ही 1800 मीटर लंबाई में जल अवशोषण ट्रेंच एवं सीपीटी संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिनसे प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख लीटर जल भूमि में समाहित होगा। पांच एकड़ क्षेत्र में 5000 कंटूर ट्रेंच तैयार किए गए हैं, जिनकी क्षमता लगभग 70 लाख लीटर वर्षा जल के संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण की है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का बहाव नियंत्रित होगा, मिट्टी का कटाव रुकेगा, भूजल स्तर में सुधार होगा तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

गांव में जल संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगभग पांच लाख रुपये की लागत से 40 बोल्डर चेक डेम बनाए गए हैं। इसके अलावा 1.80 लाख रुपये की लागत से दो गेबियन संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जो बरसाती जलधाराओं को नियंत्रित कर जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। क्षेत्र में 19 लाख रुपये की लागत से एक पक्का चेक डेम भी निर्मित किया गया है, जिससे लगभग 15 एकड़ कृषि भूमि को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी तथा 12 कृषक परिवारों के साथ उद्यान विभाग की नर्सरी को भी पर्याप्त जल मिलेगा। इसी प्रकार 16 लाख रुपये की लागत से एक अर्दन चेक डेम का निर्माण किया गया है, जिससे लगभग 10 एकड़ भूमि सिंचित होगी और पांच कृषक परिवार सीधे लाभान्वित होंगे। इन सभी संरचनाओं के कारण वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा तथा क्षेत्र में कृषि उत्पादन और हरित आवरण दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ग्राम बरदर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विगत वर्ष यहां तीन एकड़ क्षेत्र में 500 पौधों का सफल वृक्षारोपण कर उनका संरक्षण किया गया था। इस वर्ष इस अभियान को और व्यापक रूप देते हुए उद्यान विभाग द्वारा 22 एकड़ क्षेत्र में दो हजार से अधिक फलदार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही नर्सरी विकास का कार्य भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ स्थानीय लोगों को बागवानी के नए अवसर प्राप्त होंगे। विकसित हो रहा यह फलोद्यान केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से दर्जनों महिलाओं को स्थायी रोजगार, नियमित आय और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा। फल उत्पादन, पौधों के रखरखाव, नर्सरी प्रबंधन और प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण परिवारों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ग्राम बरदर में विकसित हो रहा यह समेकित मॉडल जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन, कृषि विकास और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम है। कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन में तैयार किया जा रहा यह प्रयास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रहा है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल न केवल जल संकट से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि हरित विकास, टिकाऊ कृषि, महिला आजीविका और ग्रामीण समृद्धि का सशक्त उदाहरण बनकर एमसीबी जिले की नई पहचान स्थापित करेगा।

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