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India rejects US agriculture demands

अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर एक बार फिर से तनाव का माहौल बन गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की अटकलों के बीच 25% टैरिफ लगाने का मुद्दा गरमाया हुआ है। अमेरिका ने भारत पर यह टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली थी और इसकी डेडलाइन 31 जुलाई तय की गई थी। हालांकि, अब इसे एक सप्ताह के लिए टालते हुए 7 अगस्त कर दिया गया है।

इस बीच, भारत सरकार की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी का बड़ा बयान सामने आया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप की 25 फीसदी टैरिफ नीति का भारत पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा और भारत किसी भी कीमत पर अपने किसानों, डेयरी सेक्टर और MSMEs के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत न तो संशोधित फसलों के आयात को अनुमति देगा, और न ही अपनी घरेलू नीतियों को अमेरिकी दबाव में बदलेगा।

दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत डेयरी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटाए, जिससे अमेरिकी उत्पादों को भारतीय बाजार में एंट्री मिल सके। साथ ही, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स पर भी अमेरिका टैरिफ में कटौती की मांग कर रहा है। भारत इस मांग पर बिल्कुल सहमत नहीं है। भारत का मानना है कि कृषि और डेयरी सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अगर इन पर विदेशी उत्पादों को खुली छूट दी जाती है, तो देश के छोटे किसानों और उद्योगों को भारी नुकसान हो सकता है।

सरकार का यह भी मानना है कि उच्च टैरिफ लगाकर वह घरेलू उत्पादों को प्रमोट कर रही है, जिससे स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य मजबूत होता है। यही वजह है कि अमेरिका की बार-बार की मांग के बावजूद भारत ने अपनी स्थिति में कोई नरमी नहीं दिखाई है।

ऐसे में अब सबकी निगाहें 7 अगस्त पर टिकी हैं, जब अमेरिका की नई टैरिफ डेडलाइन लागू हो सकती है। क्या तब तक कोई समझौता होगा या दोनों देश अपनी-अपनी नीतियों पर अडिग रहेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन फिलहाल भारत का रुख साफ है – “हम अपने किसानों और उद्योगों की कीमत पर कोई विदेशी दबाव स्वीकार नहीं करेंगे।”

 

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