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CG News: ब्लॉक में कटगी समेत आसपास बसे 27 गांव बलौदाबाजार जिले में हथकरघा उद्योग का हब हैं। यहां करीब 5 से 7 हजार बुनकर अपने हाथों से कॉटन की साड़ियां बनाते हैं। 5 कारीगर 2 दिन काम करते हैं, तब एक साड़ी तैयार होती है। इनकी डिमांड मुंबई, कोलकाता जैसे देश के बड़े शहरों से लेकर विदेशों तक है। बुनकरों को इसके बदले 125 रुपए रोजी मिलती है। यानी एक साड़ी बनाने पर 1250 रुपए। जबकि, साड़ियां बाजार में 10 हजार रुपए तक बेची जा रहीं हैं।
इस बीच 87.5% फायदा महाजन और दुकानदार ले जाते हैं। इसी से तंग आकर कटगी में 27 गांव के बुनकरों की बैठक बुलाई गई। इसमें 52 महाजनों को भी बुलाया गया था, जो उन्हें धागा देकर रोजी में साड़ियां बनवाते हैं। एक भी महाजन नहीं आया। ऐसे में तय हुआ कि अब कपड़ों की कीमत पर बात हुए बिना हथकरघों को हाथ नहीं लगाएंगे। ऐसे में शनिवार से कसडोल का हथकरघा उद्योग बंद हो गया है।
प्रदर्शन को बाजार से जोड़कर देखा जाए तो अभी हफ्ते-10 दिन उतना असर नहीं पड़ेगा क्योंकि व्यापारियों के पास स्टॉक है। हालांकि, बाद में कॉटन की साड़ियों का हिसाब-किताब बुरी तरह गड़बड़ा सकता है। इससे बुनकरों की रोजी-रोटी भी प्रभावित होगी, लेकिन उनका कहना है कि अपने पुश्तैनी कारोबार को बर्बाद होने से बचाने के लिए उनके पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं बचा है।

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