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जिला दंतेवाड़ा में अपने प्रवास के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भारत सरकार, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने रविवार को बाल मित्र पुस्तकालय, जैविक कृषि, नव गुरुकुल एवं एसएचसी सेंटर घोटपाल का अवलोकन भ्रमण किया। केन्द्रीय राज्य मंत्री सर्वप्रथम मुख्यालय के चितांलका ग्राम स्थित बालमित्र पुस्तकालय पहुंची। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा शाला त्यागी बच्चों को नवीन शिक्षा के क्षेत्र में जोड़ने के लिए बच्चों की पुस्तकालय के साथ बाल-हितैषी जिला बनाने की पहल की गई है। ताकि जिले के जितने भी शाला त्यागी बच्चे है उन्हें बाल मित्र कार्यक्रम योजना से जोड़ा जाए। जिससे बच्चों का मन पुस्तकीय ज्ञान की और आकर्षित हो सके। इस संबंध में जिले के

प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा ने मंत्री को अवगत कराया कि जिले में संचालित बाल मित्र पुस्तकालय एवं गतिविधि केन्द्र अभी तीन विकासखण्ड में प्रारंभ की गई है। ’’बाल मित्र कार्यक्रम’’ दंतेवाड़ा के बच्चों की शैक्षिक, सुरक्षा और विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक अग्रणी पहल है। जिला प्रशासन और गैर-लाभकारी संगठन ’’बचपन बनाओ’’ के सहयोग से विकसित, यह कार्यक्रम पंचायतों में बाल मित्र पुस्तकालय सह गतिविधि केंद्र (बीएलसीएसी) की स्थापना पर केंद्रित है। ये केंद्र बच्चों के लिए शिक्षा के संदर्भ में सुरक्षित, सुलभ स्थान प्रदान करते हैं इस कार्यक्रम के द्वारा साक्षरता, सामाजिक भावनात्मक विकास और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के केंद्र में बाल मित्र साथी के रूप में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर सहयोग लिया जायेगा।

इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री ने उपस्थित बच्चों के साथ रुबरु होकर उनकी विभिन्न गतिविधियों को देख कर प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित बच्चों से उनके पढ़ाई विषयक पुस्तकों के बारे मे जानना चाहा। बच्चों ने भी उन्हें उत्साहपूर्वक विभिन्न पुस्तकों जैसे “तीन साथी” और “मुन्नी करें बात बकरी के साथ” जैसी किताबों के बारे में तथा इनसे संबंधित कविता सुनाया। इससे मंत्री ने बच्चों की तारीफ करते हुए उन्हें प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा कि शाला त्यागी बच्चों के लिए की जा रही यह पहल न केवल बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने का उदाहरण है, बल्कि उनके भीतर रचनात्मकता और आत्म विश्वास भी बढ़ाने में सहायक है। पुस्तकालयों के ऐसे कार्यक्रम बच्चों के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके पश्चात उन्होंने कारली ग्राम अन्तर्गत जैविक कृषि कर रहे प्रगतिशील कृषक देवचंद यादव द्वारा किए जा रहे कृषि फार्मिंग को देखा। कृषक देवचंद यादव पीढ़ियों से जैविक कृषि के माध्यम से धान गोभी, करेला, मूली, बरबट्टी, धनिया और अन्य सब्जियों उगा रहे है। इस दौरान श्रीमती पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का जैविक कृषि की ओर बढ़ना एक प्रेरणादायक पहल है।

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