गिरिडीह. चार बेटियों ने माता की अर्थी को न सिर्फ कंधा दिया; बल्कि चिता को मुखाग्नि देकर उन रूढ़ियों को तोड़ा है, जिन पर समाज सिर्फ बेटों का अधिकार होने की बात कहता है. माता की मौते होने पर बेटियों ने न केवल स्वयं को संभाला बल्कि मता की मृत्यु के बाद किए जाने वाले क्रिया कर्मों को भी निभाया. ‘अपराजिता नारी’ का परिचय देने वाली इन बेटियों के आत्मबल की सभी चर्चा कर रहे हैं. (रिपोर्ट व फोटो- एजाज अहमद)