Uttrakhand News: 2013 में केदारनाथ आपदा और 2011 में सिक्किम भूकंप के कारण हुए भूस्खलन जैसे सभी मौसमी और घटना-आधारित भूस्खलनों को मैप करने के लिए इसरो के उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया है. वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश जैसी चरम मौसम की घटनाओं ने पिछले कुछ वर्षों में भूस्खलन का खतरा बढ़ा दिया है. नए अध्ययन में 2000 और 2022 के बीच 80,933 भूस्खलन हॉट स्पॉट दर्ज किए गए, जिनमें से अधिकतम 12,385 मिजोरम के हैं, इसके बाद उत्तराखंड 11,219, जम्मू और कश्मीर 7,280 और हिमाचल प्रदेश में 1,561 रहे. दक्षिणी राज्यों में, सबसे अधिक भूस्खलन हॉट स्पॉट केरल (6,039) में दर्ज किए गए थे.