करौली के इतिहास की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ शिक्षक तुलसीदास मुदगल के मुताबिक करौली क्षेत्र ब्रज क्षेत्र का एक हिस्सा है. यहां बोले जाने वाली बोली ब्रज भाषा का ही अंश है. करौली में खड़ी बोली का प्रचलन सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. जो यहां की लोकल भाषा, ब्रज भाषा और मेवाती के मिश्रण से बोली जाती है