Water Day: सीबीएसई नेशनल साइंस कॉपीटिशन में 11वीं की छात्राओं ने 500 रुपए में ड्रेनेज वॉटर रीयूज का मॉडल बनाकर पेश किया। बताया कि कैसे बारिश की पानी को रीयूज किया जा सकता है…
ऐसे करेगा काम
हमारे देश की सड़कें अक्सर टेढ़ी होती हैं। उससे सटी नालियों का पानी पाइप के जरिए जमीन में गड़े टैंक में जाएगा। वहां नेचुरल फिल्टर रेत और पत्थर के जरिए वह साफ होगा और अंडर ग्राउंड रखी टंकी का पानी पाइप से वापस लिया जा सकेगा। इस पानी का इस्तेमाल खेती-किसानी में किया जा सकेगा।
इन चीजों से बनाया
रीत ने बताया, कार्डबोर्ड और स्ट्रॉ हमने घर में पड़े कार्डबोर्ड के वेस्ट से लिए हैं। सोलर पैनल, नेट, विंडमिल और एलईडी खरीदे हैं, वो सब 400-500 रुपए में आ गए थे। पेंट और अन्य सामग्री स्कूल से ही मिल गई थी।
धरसींवा ब्लॉक क्रिटिकल कैटेगरी में
देवपुरी स्थित सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के रीजनल डायरेक्टर डॉ. प्रबीर कुमार नायक ने बताया, राजधानी की सीमा में कुल 1630 उद्योग, 330 अधोसंरचनाएं और 25 खनन क्षेत्र हैं। लघु उद्योगों के अंतर्गत आने वाले 1799 उद्योगों,खनन, अधोसंरचना को 10 केएलडी पानी की आवश्यकता है। 168 उद्योगों,खनन, अधोसंरचना को मध्यम श्रेणी में और 13 उद्योगों, खनन, अधोसंरचना को बड़े पैमाने के अंतर्गत आते हैं।