अधिवक्ता अमरेंद्र अमर ने बताया कि अगर बच्चे का नाम हटा दिया गया था तो फिर कोर्ट को क्यों नहीं जानकारी दी गई. भारतीय दंड संहिता की धारा 82 में इस बात का जिक्र है कि 7 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है. उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि बच्चे को देख सीजीएम ने बेल देने से इंकार कर दिया.