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हाइलाइट्स

बहराइच में जेठ मेला आयोजन पर कोर्ट का इनकार
हाईकोर्ट- धार्मिक स्थल खुले, पर मेला बिना अनुमति नहीं
याचिकाकर्ताओं को याचिका की वैधता साबित करने का आदेश

Bahraich Jeth fair: उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित सैय्यद सालार मसूद गाजी दरगाह पर हर वर्ष लगने वाले पारंपरिक जेठ मेले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शनिवार को आदेश देते हुए दरगाह प्रबंध समिति को इस वर्ष मेला आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों पर आम नागरिकों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती है। लेकिन बड़े आयोजनों जैसे मेलों के लिए विशेष प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होती है और मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रशासन के फैसले को दी गई थी चुनौती
यह मामला तब उठा जब बहराइच जिला प्रशासन ने 26 अप्रैल को कानून-व्यवस्था के मद्देनज़र इस वर्ष जेठ मेला आयोजित करने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले के खिलाफ दरगाह शरीफ की प्रबंध समिति और अन्य पांच स्थानीय निवासियों ने 7 मई को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जेठ मेला वर्षों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे बिना किसी ठोस कारण के रोका जाना संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
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कोर्ट की कार्यवाही और निर्णय
8 मई को राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया, जिसमें जिलाधिकारी के आदेश को सही ठहराया गया। इसके बाद 14 मई को अंतरिम राहत की सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने दरगाह की सीमा से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।
16 मई को अदालत ने याचिकाकर्ताओं को तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया और 19 मई को अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित की। याचिकाकर्ताओं ने मेले की निर्धारित तिथि 18 मई होने के चलते शीघ्र सुनवाई की मांग की, जिस पर 17 मई को विशेष पीठ गठित कर सुनवाई की गई।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से उनकी याचिका की वैधता (locus standi) सिद्ध करने को कहा और स्पष्ट किया कि जब तक यह सिद्ध नहीं होता, तब तक याचिका पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता।
धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी दोहराया कि आम नागरिक धार्मिक स्थलों पर आ-जा सकते हैं और इस पर कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन भीड़भाड़ वाले आयोजनों, विशेषकर मेलों, के लिए प्रशासन की अनुमति अनिवार्य है, और इस बार यह अनुमति नहीं दी गई है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित है, जिसमें याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका की वैधता साबित करनी होगी।
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