दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा तिहाड़ जेल में बंद एक दोषी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसकी जेल में काम करने के दौरान दाहिने हाथ की तीन अंगुलियां कटनी पड़ी थीं. हाईकोर्ट ने कैदियों को काम के दौरान चोट लगने पर मुआवज़े को लेकर दिशानिर्देश जारी करते हुए साफ कहा कि यह मुआवज़ा उसका मौलिक अधिकार है.