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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह ठप होने के आसार नजर आ रहे हैं. छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन ने बकाया भुगतान और अन्य समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन का ऐलान किया है. इस आंदोलन के चलते प्रदेश भर में धान खरीदी प्रभावित हो सकती है. रायपुर के राम मंदिर प्रांगण में आयोजित बैठक में प्रदेश के 33 जिलों से लगभग 1,500 राइस मिलर्स ने हिस्सा लिया.

इस दौरान निर्णय लिया गया कि जब तक वर्ष 2022-23 की कस्टम मिलिंग का बकाया भुगतान नहीं किया जाता और एसएलसी यानी स्टॉक लेवल चार्ज की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक राइस मिलर्स किसी भी धान खरीदी केंद्र से धान का उठाव नहीं करेंगे.

राइस मिलर्स का चार हजार करोड़ बकाया

प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा कि हमारे पास धन की भारी कमी है. 80 प्रतिशत छोटे मिलर्स बिना अग्रिम भुगतान के काम नहीं कर सकते. सरकार से बार-बार अनुरोध के बावजूद हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है. राइस मिलर्स का करीब 4,000 करोड़ रुपए बकाया है. मिलर्स का कहना है कि यह राशि किस्तों में भी दी जा सकती है, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है. सरकार ने राइस मिलर्स के लिए धान का मूल्य 80 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, जिसके लिए उन्होंने धन्यवाद दिया. लेकिन, बिना बकाया राशि भुगतान के यह मूल्य व्यावहारिक नहीं है. सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए अग्रिम भुगतान का वादा किया है, लेकिन पुराने बकाया को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी है

13 दिसंबर से आंदोलन की होगी शुरुआत

राइस मिलर्स ने 13 दिसंबर से पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है. 13 जनवरी को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा. 20 दिसंबर तक समस्या का समाधान ना होने पर मिलर्स ने धान खरीदी केंद्रों से धान का उठाव रोकने और बारदाने की आपूर्ति बंद करने का निर्णय लिया है. मिलर्स का यह कदम किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा. धान खरीदी केंद्रों में रुकावट होने से किसानों का धान नहीं उठ पाएगा, जिससे उनकी फसल का नुकसान हो सकता है. अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने आगे कहा कि हम नहीं चाहते कि किसानों को कोई परेशानी हो, लेकिन हमारी अपनी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो हम मजबूर हैं.

छोटे मिलर्स की स्थिति हो सकती है गंभीर

मिलर्स का दावा है कि बकाया भुगतान ना होने से छोटे मिलर्स आर्थिक संकट में हैं.  कुछ मिलर्स आर्थिक संकट की वजह से आत्महत्या कर चुके हैं. यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. मिलर्स ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है. उनका कहना है कि सरकार को किसानों और मिलर्स दोनों के हितों को ध्यान में रखकर समाधान निकालना चाहिए. 20 दिसंबर तक समाधान ना होने की स्थिति में राइस मिलर्स धान उठाव पूरी तरह बंद कर देंगे, जिसका सीधा असर धान खरीदी पर पड़ेगा. यह ना केवल किसानों, बल्कि पूरे प्रदेश की खाद्य आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है. अब देखना यह है कि सरकार और राइस मिलर्स के बीच यह विवाद कैसे सुलझता है.

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