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निकाय चुनाव के लिए वार्डों का आरक्षण जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा किए जाएंगे, जबकि निकायों में महापौर और अध्यक्षों के चुनाव के लिए आरक्षण राजधानी रायपुर में होगा। राज्य शासन छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए वार्डो का आरक्षण) नियम, 1994 के नियम 5 के अंतर्गत प्रदेश के नगर पालिक निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के वाडों के आरक्षण की कार्यवाही के लिए संबंधित जिले के कलेक्टर को विहित प्राधिकारी नियुक्त किया गया है।

निकाय चुनाव के नियमों का प्रकाशन

वहीं सूत्रों की माने तो आरक्षण की प्रक्रिया अगले सात दिन में पूरी हो सकती है। बता दें कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निकाय चुनाव की तैयारी जोरों पर की जा रही है। चुनाव के लिए बुधवार को सभी कलेक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया। एक दिन पहले निकाय चुनाव के लिए नियमों का प्रकाशन भी किया गया।

भाजपा-कांग्रेस को आरक्षण का इंतजार

बता दें कि निकाय चुनाव लड़ने के इच्छुक भाजपा-कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को वार्डों के आरक्षण का बेसब्री से इंतजार है। वहीं, महापौर और अध्यक्षों का चुनाव लड़ने का सपना संजोए पदाधिकारियों को भी इसका इंतजार है। आरक्षण के बाद संबंधित वर्ग के नेता महापौर और अध्यक्ष के टिकट के लिए अपनी पार्टी में दावा ठोंकेंगे।

सात दिन में हो जाएगा आरक्षण

सूत्रों के अनुसार, निकाय चुनाव के लिए वार्डों के लिए आरक्षण के लिए जिलों के कलेक्टरों को विहित प्राधिकारी नियुक्त करने के बाद अब सात दिन के भी सभी निकायों जहां चुनाव होंगे, वहां वार्डों का आरक्षण सात दिन के भीतर हो जाएगा। इसके बाद ही निकाय चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आचार संहिता की घोषणा की जाएगी। बताया जाता है कि 20 दिसंबर के बाद निकाय चुनाव की आचार संहिता लग सकती है।

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